मेरा सदग्रंथ….. नज्म-ए-दिल

Ashutosh Jadaun

रचनाकार- Ashutosh Jadaun

विधा- कविता

तेरी अदाओ के मयखाने मे ,
कशमकश है मोहब्बत की ,
फिर क्यू ये तेरा दिल शोर ना करे ।

अश्क बेकरार है आँखो मे आने को ,
सुलगती आग को औस करने को ,
फिर क्यू ये तेरा दिल शोर ना करे ।

हर तरफ है यादों की लहर ,
कोई डर नही है जुल्मों के दौर का ,
फिर क्यू ये तेरा दिल शोर ना करे ।

तेरी तमन्नाओं को साँसों मे बांध कर ,
हर जख्म के लिए तैयार बैठे है ,
फिर क्यू ये तेरा दिल शोर ना करे ।

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Ashutosh Jadaun
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स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है II

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