==मेरा भारत ” सोन चिरैया “==

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

"सोन चिरैया " शब्द भारत के उस स्वर्णिम युग का परिचायक था,
जब सकल विश्व इस महादेश के व्यापारियों
का संवाहक था।
सर्वोत्कृष्ट थी संस्कृति अपनी, थी सभ्यता सबसे प्राचीन,
सब थे शिष्य हमारे लंका, नेपाल, जापान
हो या चीन।
पूरब से पश्चिम तक ऐसा, बजता था अपना डंका,
भारत था सर्वश्रेष्ठ विश्व में, कहीं कोई नहीं थी शंका।
सुदूर देशों से अनेकों भारत में आए थे व्यापारी,
शनैः शनैः देश के व्यापार में उन्होंने सेंधें मारी
किन्तु कालांतर में समय ने बदली ऐसी करवट
उदारता का हमारा सद्गुण, दे गया हमको संकट।
विदेशी आततायियों से 15 अगस्त 1947 को हुए हम स्वतंत्र
देश में छाई शांति देश में आया लोकतंत्र।
यद्यपि एक भारत, श्रेष्ठ भारत हो हमारा
यह दिया हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने नारा।
तथापि हमें समझना होगा कि,
क्या है इसका अभिप्राय सारा।
महान नेता वल्लभभाई पटेल ने किया,
सारे छोटे राज्यों रियासतों का एकीकरण।
एक भारत श्रेष्ठ भारत का इसी में से, निकला है समीकरण।
भारत आज तरक्की पर है, देख रहा सारा संसार,
किन्तु बाह्य और आंतरिक खतरे खड़े यहां हजार।
नेताओं की अंतहीन ईष्या हो या आरक्षण का बवंडर,
आंतकवाद, अलगाववाद, बार्डर पर गोलियों ने कर दिए कई घर खंडहर।
नारी इज़्ज़त से खिलवाड़, बालिका भ्रूण हत्या, कृषक समस्या, बेरोजगारी
सबकी सब बनकर उभरी हैं देश में महामारी।
गृह युद्ध के पसरे हैं देश में विविध प्रकार,
तिस पर देश की बाह्य सीमाओं पर,
शत्रु खड़े करने को प्रहार।
बंधुओं, हमें इन समस्त रोगों को समूल मिटाना है।
"हमें यह करना चाहिए" के स्थान पर,
"हमें यह करके ही दिखाना है" का जिद्दी नारा लगाना है।
युवाशक्ति को दृढ़ता से आगे आना है। अपनी सोच को सकारात्मक बनाना है।
पहले घर में, फिर समाज में, तत्पश्चात,
प्रांत- प्रांत में दिलों की दूरियाँ मिटाना है।
भाषा, धर्म, स्थान, प्रांत का भेद ह्रदयों से हटाना है।
देश का हो चहुंमुखी विकास है मोदी जी का सपना,
नोट बंदी की और लाए डिजिटल इंडिया, कैशलेस भारत, जी एस टी और जन धन योजना।
सुनियोजित योजनाएं हमारी होंगी तभी त्वरित प्रभावी,
जब होगी हमारी युवा वाहिनी सेना हर योजना पर हावी।
फिर कोई शत्रु सर न उठा पाएगा न घर के न भीतर घर के बाहर।
जाति धर्म पर न टकराएंगे भाई भाई
नारी रहेगी सुरक्षित बेटी के जन्म पर,
खुश होकर बोलेंगे – "लक्ष्मी आई।"
यह दिन बिल्कुल दूर नहीं है रहिए पूर्ण आश्वस्त।
घर घर में गुंजित होगा नारा
एक भारत श्रेष्ठ भारत।
यदि हम रहे कृतसंकल्प तो वह दिन दूर नहीं हैं भैया
कि इक पुनः मेरा भारत बन जाएगा "सोन चिरैया"।

जय जय भारत जय जय भारत।
—रंजना माथुर दिनांक 30 /07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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