मेरा ठिकाना -६—मुक्तक—डी. के. निवातियाँ

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- मुक्तक

हर किसी का होता है जहान में एक ठिकाना
राहे भले हो जुदा-जुदा मंजिल सभी को पाना
उम्र बिता देता है हर कोई ये पहेली बुझाने में
ना जान पाता कोई कि कहाँ है मेरा ठिकाना !!
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@_____डी. के. निवातियाँ ____@

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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4 comments
  1. मात्र चार लाइन में ज़िंदगी की पूरी हकीकत कही आपने ……

    दुबार कमेन्ट करने को मज़बूर हो गया मैं ….

    लाजवाब