मेरा ठिकाना–१०—मुक्तक—-डी के निवातिया

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- मुक्तक

सीना ताने खड़ा रहूँ, हर पल दुश्मन हो निशाना
अंत घडी जाये प्राण, लबो पे हो जयहिंद का नारा
चाह नही मुझे किसी, धन दौलत या शोहरत की
देश सेवा में लगा रहूँ सरहद पर हो मेरा ठिकाना ।।



डी के निवातिया_____।।।

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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