मेघ,,,, कुछ हाइकु

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- हाइकु

₹जैहिंद के हाइकु

सुनाई नानी
कल रात कहानी
बरखा रानी ।

मेघ गरजा
जीवों का मन हर्षा
आई बरसा ।

बादल दानी
चली पूर्वा सुहानी
आशाएँ जागीं ।

ठुमके मोर
बच्चे मचाएँ शोर
गिनूँ मैं पोर ।

झींगुर-बोल
दादुर पीटे ढोल
हो गई भोर ।

घन तड़के
लो बारिश टपके
तन तरसे ।

=== मौलिक ====
दिनेश एल० “जैहिंद”
08. 07. 2017

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दिनेश एल०
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मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,

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