** मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

चाहत कभी गुमनाम नहीं होती

राहे कभी सुनसान नहीं होती

होती चाहत तेरे दिल में मेरी

तो मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती ।।

👍मधुप बैरागी

ऐ सूरज

ज़रा

कैफियत बरत

हम तो

ऐसे भी

इश्क में

तपाए हुए हैं

अपनी तपिस

को

सीने में

बचा के रख

आने वाली

सर्द में

काम आएगी ।।

👍मधुप बैरागी

Views 20
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 364
Total Views 7.9k
मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia