मुहब्बत आप करते है

बसंत कुमार शर्मा

रचनाकार- बसंत कुमार शर्मा

विधा- गज़ल/गीतिका

सताया है बहुत हमने, शिकायत आप करते हैं
हमारे ख्वाब में आकर, शरारत आप करते हैं

ये माना हम नहीं दिल में, बताओ फिर जरा ये भी
हमारी चिट्ठियों की क्यूँ, हिफाजत आप करते हैं

मोहब्बत ही इबादत है, खुदा है और ईश्वर भी
सुना हमने, यही पूजा, इबादत आप करते हैं

उड़ा देता हवा में सब, नहीं सुनता हमारी कुछ
भले ये दिल हमारा है, हुकूमत आप करते हैं

बड़ी तरकीब से हमने, छुपाया है तुम्हें दिल में,
हमारी इस अमानत में, खयानत आप करते हैं

न जाने क्यों हमें अच्छा नहीं लगता कभी भी जब,
रकीबों पर नजर अपनी, इनायत आप करते हैं

भले मुँह से कहो कुछ भी, बता देतीं हैं’आँखें सब
हमें मालूम है हमसे, मुहब्बत आप करते है

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बसंत कुमार शर्मा
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भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन

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