मुस्की दे, प्रेमानुकरण कर लेता हूँ

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- मुक्तक

बैरी से भी ज्ञान ग्रहण कर लेता हूँ
अमल भाव में चार चरण कर लेता हूँ
दुख में भी है बोध, सजग 'नायक' बनकर
मुस्की दे, प्रेमानुकरण कर लेता हूँ

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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मुस्की=मुसकराहट
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प्रकाशित मुक्तक
श्रेष्ठ काव्य प्रभा खंड 1
उक्त कृति में वर्ष 2011में मेरी 04 रचनाएं प्रकाशित हुईं थी

10-4-2017

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Brijesh Nayak
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
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