मुश्किलों के दौर को

Shivkumar Bilagrami

रचनाकार- Shivkumar Bilagrami

विधा- गज़ल/गीतिका

मुश्किलों के दौर को हम खुद पे ऐसे सह गए
कुछ तो आँसू पी लिए कुछ एक आँसू बह गए

उम्र भर आँखों में पाला था जिन्हें अपना समझ
ख्व़ाब वो ऐसे गए हम देखते ही रह गए

रफ़्ता रफ़्ता रात दिन हमको मिटाया वक़्त ने
रेत का हम घर न थे जो एक पल में ढह गए

आप उनके दर्द को हरगिज़ न कमतर आंकिये
वक़्त की यह दास्ताँ जो मुस्कुराकर कह गए

क्या बताऊँ मैं तुम्हें अब ज़ख्म कैसे हैं मेरे
भर गए हैं ज़ख्म लेकिन दाग़ फिर भी रह गए

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Shivkumar Bilagrami
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शिवकुमार बिलगरामी : जन्म 12 अक्टूबर : एम ए (अंग्रेज़ी ): भारतीय संसद में संपादक पद पर कार्यरत । शिवकुमार बिलगरामी आज के दौर के मशहूर शायर और गीतकार हैं। आपकी ग़ज़लें देश विदेश के कई ग़ज़ल गायकों द्वारा गाई जा रही हैं । इनका एक ग़ज़ल संग्रह नई कहकशां प्रकाशित हो चुका है।

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