“मुझे सावन रुलाता है” (गीत)

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- गीत

विरह गीत
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बरसता भीगता मौसम,
अगन तन में लगाता है।
करूँ क्या तुम बताओ मैं,
मुझे सावन रुलाता है।

दिवा जब अंक में जाता,
निशा घूँघट उठाती है।
रजत सी चाँदनी लोरी,
सुनाती संग आती है।
चमकता नूर चंदा का-
सनम पल भर न भाता है।
करूँ क्या अब बताओ तुम,
मुझे सावन रुलाता है।।

मचलती धार सागर की,
उमंगें साथ लाती है।
किनारे जब अलग देखूँ,
प्रीत आँसू बहाती है।
मलय का मंद झोंखा भी-
याद तेरी दिलाता है।
करूँ क्या अब बताओ तुम,
मुझे सावन रुलाता है।।

अधूरी आस जब देखूँ,
व्यथाएँ मौन की सहती।
तड़प कर पीर की सरगम,
कहानी दर्द की कहती।
भरोसा उठ गया खुद से-
नहीं कुछ रास आता है।
करूँ क्या अब बताओ तुम,
मुझे सावन रुलाता है।।

डॉ. रजनी अग्रवाल "वाग्देवी रत्ना"
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज,वाराणसी।(मो.-9839664017)

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Dr.rajni Agrawal
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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

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