मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था।

Vindhya Prakash Mishra

रचनाकार- Vindhya Prakash Mishra

विधा- कविता

मुझे श्रेष्ठ होने का भ्रम था
ज्ञान कही कुछ कम था।
अपना देखा बेहतर माना
नही किया तुलना लोगो से।
देखा जब संसार घूमकर
पाया अपने को अंजाना
बेहतर सतत परिश्रम का फल है।
ठहर गये तो गिर जाओगे
सदा चले मंजिल पाओगे।
विन्ध्यप्रकाश मिश्र
विप्र

Sponsored
Views 547
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Vindhya Prakash Mishra
Posts 110
Total Views 3.2k
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia