मुझे याद हे

pratik jangid

रचनाकार- pratik jangid

विधा- कहानी

मुझे याद हे
जब तुम मेरा हाथ मांगने आये थे I
थोडा घबराये और कितना शरमाये थे I
बाते करने में भी तुम कितना हिचकाये थे
जब में चाय की ट्रे लेकर आई थी
और तुमने गर्म चाय को कापते हाथो से जेसे ही पीना चाहा तुमने सारी चाय अपने उपर गिरा ली थी
तुम शुरू से ही इतने शर्मीले थे I जब कभी भी में तुम से किसी बारे में बात करती तुम बिना किसी बात के तुम हा कर देते थे I
और वो तुम्हारी फ्रेंड किसने तुम्हारा नाम शर्मीली बानो रखा था तुम्हारी कितनी हेल्प करती थी
मुझे याद हे !
तुम क्लास में अव्वल जरुर थे पर बहार एक न. के फटू थे !
और यह भी याद हे जब कोलेज के वो आवारा लड़के मुझे और मेरी फ्रेंड को छेड़ रहे थे ! तुमने अपनी स्मार्टनेस दिखने में उनसे कितनी मार खायी थी ! मुझे याद हे तुम मुझसे प्यार करते थे पर तुममे जाहिर करने की हिम्मत नहीं थी ! मुझे तो यह बात तभी मालूम हो गयी थी जब तुम अपनी पडोसी कॉल्लेज फ्रेंड से मेरे बारे में पूछा करते थे ! मुझे सब याद हे ! तुम्हारा वो होम वर्क अधुरे का बहाना करके अपनी फ्रेंड से मेरी कॉपी लेना , और में पगली इस पल का इंतजार करती ! मुझे कब तुमसे प्यार हो गया मुझे कुछ पता नहीं चला ! खेर प्यार ऐसे ही होता हे !
मुझे बस ये बात नहीं पता थी की तुम्हे लिखना पसंद हे तुम अपने फ्री टाइम में कुछ ग़ज़ल कुछ गीत लिखते थे
यह बात तो मुझे तब पता चली जब कॉलेज केम्पस में तुमने अपनी लिखी एक कविता सुनाई थी ! सुनाई नहीं सुनानी पड़ी जी हां जब कॉलेज प्रोग्राम में अन्क्रिंग तुम्हारी फ्रेंड ने की थी और एक सभी फ्रेंड के कहने पर तुम्हारी बिना इजाजत के तुम्हरा नाम अलोउंस कर दिया था !
तुम कितने शर्मा रहे थे फिर तुमने अपने आप को संभालते हुए एक गीत की कुछ लाइने कही थी
तुम जेसी हो वेसी ही रहना
ये दुनिया रंग बदलू हे पर पर तुम कभी न बदलना !
तुम मुझमें हो और में तुझमे
तुम हमेश ऐसे ही मुस्कुराते रहना मुस्कुराते रहना !
…………………………….!
BY (प्रतीक जांगिड )15-11-2016

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