मुझे तो कुत्ता ही बनाना

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- लेख

सुबह की सैर भी कमाल की होती है। सब ओर खुशनुमा सा वातावरण। सूरज की तलाश मे निकलता सवेरा सूरज की किरणों को अपनी बाँहों मे लेने को आतुर सा। अंगड़ाई सी लेते अभी अभी सोकर उठें पेङ ,पौधे ,फूल पत्ते । चहचहाते पक्षी और कोयल की कुहू कुहू का मधुर स्वर। कहीं मंदिर से आती घंटों की आवाज। मंद मंद चलती उन्मुक्त पवन। ये सब जैसे मन में नई स्फूर्ति और चेतना का प्रवाह कर देते है।
रोज मैं नये नये अनुभव लेते हुए इन सब का आनन्द उठाती हूँ। बहुत लोगों से भी मिलना होता है। कोई दौड़ लगा रहा होता है , कोई कानोँ मे ईयरफोनलगाये हुए अपनी ही धुन मे चला जा रहा होता है। कुछ समूह में राजनीतिक वार्तालाप करते हुए होते है, लेडीज घर गृहस्थी की बाते करते हुए, कुछ औरोँ की बगिया से चुपके से पुष्प तोड़ते हुए ,तो लड़के सलमान खान बनने की धुन मे व्यायाम करते हुए। मुझे बड़ा ही मज़ा आता है ये सब देखने मे।।मैं सैर करती रहती हूँ और मेरे साथ साथ चलते हैं अनगिनत विचार। कभी २ ऐसे विचार भी होतें हैं कि खुद ही मन ही मन मुस्कुरा उठतीं हुँ और कभी यही विचार कुछ सोचने के लिये भी मज़बूर कर देते हैं। एक ऐसी ही घटना और विचार से आपको वाकिफ कराना चाहतीं हूँ ।
कुछ लोग अपने लाड़ प्यार से पाले कुत्तों को भी साथ लेकर घूमते हैँ। जब उन कुत्तों को देखती हूँ तो लगता है ये भी कुछ हमारी तरह ही सोचते हैं और आपस में बातें करते हैं। जब अपने मालिक के साथ गर्व से चलता हुआ जंज़ीर से बंधा नवाबी कुत्ता जब सड़क के आवारा कुत्तों से मिलता है तो उसकी आँखों मे मनुष्य की भांति ही गर्व सा दिखता है जैसे हुं, तुम कहाँ हम कहाँ। और बेचारा सड़क का कुत्ता भी उसे यूँ देखता है मानो कह रहा हो, क्या किस्मत पाई है इसने क्या ठाट है इसके क़ाश हमारे भी कर्म बढ़िया होते तो हम भी ऐसे हीं आलिशान बंगलें मे पल रहे होते ।अक्सर ये कुत्ते इकट्ठे होकर किसी नवाबी कुत्ते को देखकर उस पर सम्मिलित स्वर मेँ भोंकना शुरु कर देते हैं मानो अपना फ़्रस्टेशन निकाल रहे हों कि बड़ा आया नवाब कहीं का। फिर तो उसे बचाने में मालिक के भी पसीने छूट जाते हैं। कभी कभी नवाबी कुत्ता उन कुत्तों से खेलना भी चाहता है पर मालिक की डांट खाकर हट जाता है मानो समझ गया हो कि अपने स्तर के लोगों मे उठो बैठो।
कल एक ७-८ साल के बच्चे को कूड़े के ढ़ेर पर बैठें देखा। कुछ बीन रहा था शायद भूखा भी था क्योकि उसमेँ से कुछ बीन बीन कर खा भी रहा था। तभी एक नवाबी कुत्ता भी वहां आकर कुछ सूंघने लगा। मालिक ने कस कर डांटा नो बेबी ये गन्दा है चलो यहॉँ से और जेब से उसे स्पेशल बिस्कुट उसको खिला दिये। कुत्ता तो चला गया वहां से पर वो बच्चा सूनी सूनी आँखों से देखता रहा उसे जाते हुए ,मानो कह रहा हो नहीं चाहिए ये मनुष्य योनि मुझे तो कुत्ता ही बनाना ऐसा वाला। फिर लग गया वो बीनकर कुछ खाने मे………

डॉ अर्चना गुप्ता

Views 100
Sponsored
Author
Dr Archana Gupta
Posts 223
Total Views 13.4k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
3 comments