मुझे जीना सीखा दो ज़रा ( ग़ज़ल)

Onika Setia

रचनाकार- Onika Setia

विधा- गज़ल/गीतिका

मुझे जीना सीखा दो ज़रा ( ग़ज़ल)

मैने कभी नहीं देखा ख़ुशी का चेहरा ,
कैसा होता है मुझे दिखा तो दो ज़रा।
तेरी महफ़िल में सुनो ऐ मेरे साकी!
है गर मसर्रत-ऐ-जाम तो पिला दो ज़रा।
जिंदगी क्या होती है? मुझे नहीं पता,
मायने इसके मुझे भी समझा दो ज़रा।
उम्र तो ख़त्म हुई ,ना ख़त्म हुए इम्तिहान,
कहाँ तक जायेगा यह कारवां ? बता दो ज़रा।
यह तमन्ना-ऐ-दिल औ बेशुमार गम ,हाय!,
पूछना चाहती हूँ खुदा से,आकर मिल जाओ ज़राा।

Sponsored
Views 19
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Onika Setia
Posts 35
Total Views 1.2k
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं द्वारा रचित चेतना ब्लॉग , और समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेखन -कार्य , आकाशवाणी इंदौर केंद्र से कविताओं का प्रसारण .

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia