मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे- कुछ शेर

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- शेर

ऐसी लगी है आग सियासत की आजकल
मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे

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बेसबब, बेचैन होकर, बह रही है जिंदगी
आजकल खुद से यहाँ, हर आदमी है लापता

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मौत तो आनी है सबको एक दिन
मौत से पहले तू जीना सीख ले

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बहुत से ऐब हैं मुझमें, बहुत सी खूबियाँ भी हैं
तुझे क्या चाहिए मुझमें, तेरा अपना नज़रिया है

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लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
बैतूल

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लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
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मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

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