मुझको क्यो तड़पाती हो

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- गज़ल/गीतिका

तुम मेरे सपनो मे आकर,
मुझको क्यो तड़पाती हो|
हसती हंसती पास आकर,
मुझको बहुत सताती हो||

गालो को सहलाती मेरे,
मुझको दिल से लगाती हो|
कभी कभी मुस्काती  यारा,
कभी कभी इठलाती हो||

सपने मे जुल्फे फैलाकर,
गोद मे मुझे सुलाती हो|
कृष्णा तेरे प्यार मे पागल,
उसको को क्यो ठुकराती हो||

कृष्णकांत गुर्जर

Sponsored
Views 36
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कृष्णकांत गुर्जर
Posts 60
Total Views 2.6k
संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya G.v.n.school Detpone मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia