मुक्त करो

चौधरी कृष्णकांत लोधी

रचनाकार- चौधरी कृष्णकांत लोधी

विधा- कविता

आगे बढ़ना हमारी फितरत है ,
नाकामी हम जानते नहीं ,,
फिर भी कुछ मुद्दों पर
हम फेल हो गए
यह फेल होना हमारे लिए …
सबक बन गया …
हम आसमां से धरती पर गिर गए
गिरे ऐसे की उठते-उठते
लग जाएंगे महीनों …
इन महीनों को ,
हमें बदलना होगा,,
असफलता में नहीं,
बल्कि सफलता में ,,
हमें बनानी होगी एक पहचान
जो हो सबसे अलग
सबसे जुदा …
दिखा देंगे हम लोगों को
कुछ करके ऐसा काम
जो वह कभी नहीं कर सकते
हमें करना होगा
समाज को दहेज से मुक्त ,
कुर्तियों से मुक्त ,
आपसी कलह से मुक्त ,
अपनी खुद की बुराइयों से मुक्त ,
एक दूसरे को नीचा दिखाने से मुक्त,
छोटों का बड़ों के प्रति आदर ना होने से मुक्त ,
क्षेत्रीय राजनीति से मुक्त ,
अशिक्षा से मुक्त
तब होगा हर इंसान
अपने अंदर के राक्षस से मुक्त !!
शक्तिशाली ,गौरवशाली ,
देश प्रेम से परिपूर्ण श्री रामचंद्र
✍चौधरी कृष्णकांत लोधी नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

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