मुक्तक

DrRaghunath Mishr

रचनाकार- DrRaghunath Mishr

विधा- मुक्तक

हों ऐसे हम खिले-खिले।
हों न कभी हम हिले-हिले।
नए वर्ष – अभिनन्दन में,
ढहें द्वेष के सभी किले।
@ डा०रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता /साहित्यकार
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DrRaghunath Mishr
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डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' अधिवक्ता/साहित्यकार/ग़ज़लकार/व्यक्तित्व विकास परामर्शी /समाज शाश्त्री /नाट्यकर्मी प्रकाशन : दो ग़ज़ल संग्रह :1.'सोच ले तू किधर जा रहा है 2.प्राण-पखेरू उपरोक्त सहित 25 सामूहिक काव्य संकलनों में शामिल

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