मुक्तक

डॉ मधु त्रिवेदी

रचनाकार- डॉ मधु त्रिवेदी

विधा- मुक्तक

जब पुकारेगा खुदा सब कुछ धरा रह जायेगा
छोड़ दुनियाँ रूह से अपनी जुदा रह जायेगा
रुप अपना तू निखारे देख कर के आयना
एक तेरा रेत का महल ढला रह जायेगा

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डॉ मधु त्रिवेदी
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