मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

अभी रिश्ता दिलों का धड़कनों में चलने दो!
अभी #शामे_तन्हाई को रात में ढलने दो!
कभी तो मिलेगा हमें भी रास्ता मंजिल का,
रोशनी उम्मीद की बेखौफ सा जलने दो!

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

Sponsored
Views 7
इस पेज का लिंक-
Author
MITHILESH RAI
Posts 268
Total Views 376

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia