मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

आओ फिर से एक बार नादानी हम करें!
नजरों में तिश्नगी की रवानी हम करें!
जागी हुई है दिल में चाहत की गुदगुदी,
आओ फिर से जख्मों की कहानी हम करें!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
MITHILESH RAI
Posts 215
Total Views 253

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia