मुक्तक

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- मुक्तक

मुक्तक

(१)अधरों पर मुस्कान खिली जब
आँगन देखी फुलवारी।
उन्मादित नयना हर्षाए
द्वार हँसी जब किलकारी।।

(२)ढह गए प्यार के सपने बिछे जब शूल राहों में
जली अरमान की बस्ती रहे ना फूल बाहों में।
मरुस्थल बन गया जीवन सुलगती रेत छाई है
कहाँ जाऊँ बतादे तू रुदन दिल में समाई है।।

डॉ. रजनी अग्रवाल "वाग्देवी रत्ना"
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-9839664017)

Views 8
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr.rajni Agrawal
Posts 104
Total Views 2.2k
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia