मुक्तक

Neelam Sharma

रचनाकार- Neelam Sharma

विधा- मुक्तक

हूं चंचल चपल नदि मैं,बहूं या न बहूं?
उर दर्द है वेदना है सहूं या न सहूं।
डूबे हैं दर्द की स्याही में गीत मेरे
अनमनी सी व्यथा है कहूं या न कहूं ?
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चारों तरफ अंधेरा, जाने कब छटेगा।
जीवन लंबा सफर,जाने कैसे कटेगा।
बस इसी यकीन पर,अब जिंदा है आदमी,
कभी तो इस अंधकार का बादल हटेगा।
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नीलम शर्मा

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