मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

जख्म मिट गया है मगर मौजूद तेरी निशानी है!
गुजरे हुए हालात की मौजूद तेरी कहानी है!
राह देखता रहता हूँ अब भी शामों-सहर तेरी,
मेरी धड़कनों में हरपल दर्ज तेरी रवानी है!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

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MITHILESH RAI
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