मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

दर्द तेरा कायम है याद भी आ जाती है!
#शाम_ए_तन्हाई में बेइन्तहाँ सताती है!
हंसने की जब भी तमन्ना होती है दिल में,
ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

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MITHILESH RAI
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