मुक्तक

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- मुक्तक

इश्क रोकर सींचे तो क्या, मतलबी दुनिया बंजर है

मासूमियत चेहरे पे तो क्या, नफरतों का ही मंजर है

यहां बस दिल के बदले में दर्द ऐ दिल ही मिलना है

दिखावे की वफ़ा तो क्या, छुपा जब दिल में खंजर है

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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
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