मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

उठती नजर में तेरा चेहरा नजर आता है!
मुझपर तेरे प्यार का पहरा नजर आता है!
ख्वाबों के दायरे में ठहर जाती है जिन्दगी,
ख्वाहिशों का हर आलम गहरा नजर आता है!

मुक्तककार- #महादेव'

Sponsored
Views 31
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
MITHILESH RAI
Posts 249
Total Views 349

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia