मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

हम हँसते हुए जीते हैं कभी रोते भी!
हम मंजिल को पाते हैं कभी खोते भी!
कभी मिल जाती है हर खुशी तकदीर से,
कभी जिन्द़गी को अश्क हैं भिगोते भी!

मुक्तककार #महादेव' (23)

Views 1
Sponsored
Author
MITHILESH RAI
Posts 118
Total Views 86
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia