मुक्तक

MITHILESH RAI

रचनाकार- MITHILESH RAI

विधा- मुक्तक

जब भी दर्दे-सितम की इन्तहाँ होती है!
बेकरार लम्हों की जुत्सजू रोती है!
यादें भी चुभती हैं पलकों में इसकदर,
जिन्द़गी अश्कों से खुद को भिगोती है!

#महादेव_की_कविताऐं'(23)

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MITHILESH RAI
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