गज़ल :– नासूर यूँ चुभते रहे ॥

Anuj Tiwari

रचनाकार- Anuj Tiwari "इन्दवार"

विधा- गज़ल/गीतिका

गज़ल :– नासूर यूँ चुभते रहे ॥

नासूर यूँ चुभते रहे ।
क्यों बेवजह झुकते रहे ॥

लुटती रही है चाँदनी,
हम चाँद को तकते रहे ॥

खिलते रहे गुल बाग में ,
हम जाम से खुलते रहे ॥

छिपते रहे वो चाँद से ,
हम रात से ढलते रहे ॥

अनुज तिवारी "इंदवार"

Sponsored
Views 164
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Anuj Tiwari
Posts 108
Total Views 37.4k
नाम - अनुज तिवारी "इन्दवार" पता - इंदवार , उमरिया : मध्य-प्रदेश लेखन--- ग़ज़ल , गीत ,नवगीत ,कविता , हाइकु ,कव्वाली , तेवारी आदि चेतना मध्य-प्रदेश द्वारा चेतना सम्मान (20 फरवरी 2016) शिक्षण -- मेकेनिकल इन्जीनियरिंग व्यवसाय -- नौकरी प्रकाशित पुस्तकें :-- 1) नया युग नई सोच 2) परवाज़ (ग़ज़ल संग्रह) 3) जज्बात-ए-कलम 4) प्रत्याशा : एक पग पथ की ओर मोबाइल नम्बर --9158688418 anujtiwari.jbp@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia