मुंदी चोट

Yogita Tiwari

रचनाकार- Yogita Tiwari

विधा- मुक्तक

मुंदी चोट

न जाने खेलते खेलते
कब खुद को जख्मी कर लिया ,
कोई मुंदी चोट आ गई है शायद
न चोट का ज़ख्म नजर आता है
न इसका दर्द जाता है।
और घिर आएं बादल,
तो और बढ जाता है।
नानी कहती थीं
कि हल्दी की पुलटिस रख लो
तो अच्छी हो जाती है चोट ,
शायद इसलिए शादी से पहले
हल्दी की रस्म का रिवाज है,
बडे बुजुर्ग जानते हैं
दर्द बहुत होता है बाद में,
और जख्म कहां है
दिखाई भी नही देता।
तो रंग देते हैं पूरा
कि कोई मुंदी चोट आए
तो जल्दी ठीक हो जाए।

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