हल्दी

योगिता

रचनाकार- योगिता " योगी "

विधा- मुक्तक

न जाने खेलते खेलते
कब खुद को जख्मी कर लिया ,
कोई मुंदी चोट आ गई है शायद
न चोट का ज़ख्म नजर आता है
न इसका दर्द जाता है।
और घिर आएं बादल,
तो ये और बढ जाता है।
नानी कहती थीं
कि हल्दी की पुलटिस रख लो
तो अच्छी हो जाती है चोट ,
शायद इसलिए शादी से पहले
हल्दी की रस्म का रिवाज है,
बडे बुजुर्ग जानते हैं
दर्द बहुत होता है बाद में,
और जख्म कहां है
दिखाई भी नही देता।
तो रंग देते हैं पूरा
कि कोई मुंदी चोट आए
तो जल्दी ठीक हो जाए।

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योगिता
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कर्तव्य से प्रशासनिक अधिकारी एवं हृदय से कला प्रेमी।आठ वर्ष की उम्र से विभिन्न विधाओं में मंच पर सक्रिय । आकाशवाणी में युवावाणी कार्यक्रम में कविता पाठ,परिचर्चा में अनेक कार्यक्रम प्रसारित। भिन्न भिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में लेख व कविता प्रकाशित। साहित्यपीडिया के माध्यम से पुन: कला से और कलाकारों से जुडने के लिए हृदय से आभारी हूं ।

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