मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ ..

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- मुक्तक

मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ
ढलते उजालों का जैसे, मैं रवि हो गया हूँ
कोई कहता हैं पागल, कोई कहता दीवाना,
लोग देते हैं ताना, की कवि हो गया हूँ ..

– नीरज चौहान

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Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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