*** मिआं -बीवी की नौक झोक ***

अजीत कुमार तलवार

रचनाकार- अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

विधा- अन्य

तेरी सूरत अब मुझ को अच्छी नहीं लगती ,
क्या खूब लगा करती थी पहले मेरी सजनी ?

वो योवन था आज बुढ़ापा है मेरे साजन,
याद रखना वो सदा नहीं रहती एक जैसी ?

तून चलती अच्छी लगती थी अब क्या हो गयी हो ?
यह देख देख कर बड़ी पुरानी सी लगती हो !

क्या क्या मुझे तुम कहते हो , अपना कभी देखा है
बाल काले वाला लाई थी अब देखो दर्पण कैसे लगते हो ?

बच्चे भी तुम को देख देख कहते हैं मम्मी हो गयी मोटी ,
खाती पीती सब से ज्यादा , और चलाती है हम पर सोटी !

अपना तो देखते नहीं, पेट कितना निकाल कर घूमते हो,
मोहल्ले में सारी सखिया मजाक उड़ाया करती हैं तुम्हारा

चलो छोड़ो अब लडाई न करो सर्दी ज्यादा लग रही है
बनाओ जाकर गाजर का हलवा, वो पुराणी याद आ रही है !

अरे अब तो बख्स दो नौकर कोई रख लो काम वो करेगा
बिमरियन इतनी भर दी हैं कुछ काम अब नहीं होता है !

चलो ठीक है नौकर कौन आएगा तेरे लिया इस काम का
याद नहीं तुझे अब में ही तो बचा हूँ तेरे इस काम का ??

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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अजीत कुमार तलवार
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शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

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