मासूमों की मौत

सतीश चोपड़ा

रचनाकार- सतीश चोपड़ा

विधा- कविता

औकात गरीब की कोड़ी के दाम हो गयी है
संवेदना आज इंसान की नीलाम हो गयी है

कब्र से कम नहीं रह गए सरकारी अस्पताल
बिना ऑक्सीजन मासूमों की मौत हो गयी है

अड़सठ लाख के लिए रोक दी साँसे पचास
ठोकरों में आम आदमी की जान हो गयी है

उम्मीद लगाए बैठे थे गूंजेंगी किलकारियाँ
चर्चित बेबसों की अधखुली आँखे हो गयी है

एक बार जरा उस घर में भी झाँक लो यारो
वीरान जिनकी पल में सारी दुनिया हो गयी है

जाने कब फुरसत मिलेगी दुश्मनी से लोगों को
नेकदिली जिनके दिलों से रुखसत हो गयी है

औकात गरीब की कोड़ी के दाम हो गयी है
संवेदना आज इंसान की नीलाम हो गयी है

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सतीश चोपड़ा
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नाम: सतीश चोपड़ा निवास स्थान: रोहतक, हरियाणा। कार्यक्षेत्र: हरियाणा शिक्षा विभाग में सामाजिक अध्ययन अध्यापक के पद पर कार्यरत्त। अध्यापन का 18 वर्ष का अनुभव। शैक्षणिक योग्यता: प्रभाकर, B. A. M.A. इतिहास, MBA, B. Ed साहित्य के प्रति विद्यालय समय से ही रुझान रहा है। विभिन्न विषयों पर लेख, कविता, गजल व शेर लिखता हूँ। कलम के माध्यम से दिल की आवाज दिलों तक पहुँचा सकूँ इतनी सी चाहत है।

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