मार कोख में बेटी माँ की नज़रों में खुद मरते हो

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- मुक्तक

1
जब अपने ही घर में बेटी को लाने से डरते हो
पूजन कन्याओं का फिर क्यों नवरातों में करते
हो
कृत्य तुम्हारे ऐसे तुमसे माँ खुश कैसे हो सकती
मार कोख में बेटी माँ की नज़रों में खुद मरते हो

2
कभी सम्मान नारी को न घर बाहर कहीं देते
कुचल कर कोख में बेटी जनम लेने नहीं देते
न वो इंसान कहलाने के काबिल हैं जमाने में
उन्हें भगवान भी इक दिन सजा देखो यहीं देते
डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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