मान लो गीत जिन्दगी को

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- गीत

मान लो गीत जिंदगी को
और गुनगुनाना सीख लो ।
जगा लो मन में उमंगें
और मुस्कुराना सीख लो ।
उलझनें हिस्सा हैं जीवन का
सुलझ ही जाएंगी एक दिन ,
बस बार बार उनको हराकर
नैया पार लगाना सीख लो ।
राह कोई सरल मिले अगर
तो लुफ्त उठा लो जी भर ,
मिले जटिल गर कोई डगर
हो निडर गुजरना सीख लो ।
पाकर विजय कंटकों पर
ज्यों सदा मुस्काते हैं फूल,
मानव तुम भी उनके जैसा
मुश्किलों में खिलना सीख लो ।

डॉ रीता
आया नगर,नई दिल्ली -47

Views 37
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Rita Singh
Posts 82
Total Views 3.4k
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia