मानवता सिखला गए (दोहे)

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

मानवता सिखला गए, दे दी हंसकर जान !
ईसा को इस त्याग ने, बना दिया भगवान् !!

पनपा है जब जब कहीं, नफरत का बाज़ार !
ईसा ने तब तब लिया, .धरती पर अवतार !!

मानवता कायम रहे , हर दिल रहे करीब !
यही सोचकर चढ गये,.ईसा तुरत सलीब!!

मानवता जिंदा रहे,…कायम हो ईमान!
हर युग मे ईसा हुए,इसी तरह कुरबान!!
रमेश शर्मा

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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