मात नमामि रेवा मैया, जग जननी कहलावत है

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- गीत

मात नमामि रेवा मैया,
जग जननी कहलावत है|
माँ के चरणो मे हम बालक,
नित नित शीश झुकावत है

अमरकंट से निकले मैया,
सागर जान समावत है|
कल कल बहती जाती,
हम है दीप जलावत है||

भक्त हजारो आये पुकारू,
मैया गले लगावत है|
नरियल फूल कपूर की वाती,
देखो भक्त चढ़ावत है||

शिव शंकर ब्रम्हा विष्णु भी,
जिनको शीश झुकावत है|
गंगा यमुना मात नर्मदे,
जग जननी कहलावत है||

माँ की महिमा कोई न जाने,
माँ तो माँ कहलावत है|
कोढ़ी पापी लगड़ा लूला,
माँ के दरपे आवत है||

कष्टो को हर लेती मैया,
खुशी खुशी घर जावत है|
मात नमामि कष्ट विनाशक,
जग जननी कहलावत है

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कृष्णकांत गुर्जर
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