मातृत्व दिवस पर माफ़ीनामा. ….

शालिनी साहू

रचनाकार- शालिनी साहू

विधा- लेख

मातृत्व दिवस पर….. (माफ़ीनामा) प्यारी माँ….
माँ तो साक्षात् ममता की मूरत है जाने-अनजाने हम माँ से नाराज भी हो जाते हैं झगड़ा भी कर लेते हैं पर जब हम अकेले में बैठकर सोचते हैं तब दिल स्वयं को धिक्कारता है कि हमने गलत किया है माँ से ऐसे नहीं पेश आना चाहिए! ये बात आज भी मुझे बहुत अखरती है… अक्सर माँ अपने बच्चे का ख्याल बखूबी रखती है और जब बच्चा दूर रहता हो तो और भी एक-एक चीज सोचकर यादकर पैक करती है! बात ऐसी ही थी उन दिनों मैं इलाहाबाद रह रही थी गर्मियों का मौसम था माँ मुझे अपना ध्यान रखने को कहतीं,और पापा की चोरी से मुझे जूस और फल के पैसे देती रहती! माँ का दुलार ही अलग है!पापा को तो ये बात अच्छे से पता होती पर वो अनजान बने रहते जानकर भी! उस बार छुट्टियों में कुछ दिन के लिए हम घर गये थे !माँ ने बहुत ध्यान रखा और जब छुट्टियाँ बीत गयीं! मेरे इलाहाबाद वापस आने की तैयारी होने लगी तो माँ का चेहरा उदास हुआ पर उन्होंने अपनी उदासी जाहिर नहीं की मेरे लिए!क्योंकि मेरे जाने के बाद माँ अकेले रह जाती थी घर पर! लेकिन फिर भी कभी मुझे एहसास नहीं होने देती बस चुपके से रो लेती थीं सामने कभी नहीं! माँ मेरा सामान रख रही थी! मुझे ज्यादा सामान ले जाने में असुविधा होती थी इसलिए आधे से ज्यादा सामान निकल देती थी माँ का बस चले तो पूरे घर का सामान ही रख दे !लेकिन माँ फिर भी जबरदस्ती कुछ सामान डाल देती थी मेरी लाख ना करने पर भी! उस समय गर्मी बहुत थी माँ ने पानी वाले कुछ फल बैग में रख दिये थे मैं उनको ले जाना नहीं चाहती थी माँ ने धुल कर अच्छे से पॉलीथिन में बन्द करके रखा था उनकी बड़ी इच्छा थी कि मैं ले जाऊँ !पर मैंने उनकी जिद के आगे अपनी जिद कर ली माँ के बार-बार कहने पर भी एक ना सुनी और हम उसे घर पर ही छोड़ इलाहाबाद आ गये मैंने जरा भी उस वक्त नहीं सोचा कि तुमने कितने प्यार से उन फलों को धुल फिर रखा मैंने तुम्हारे उस प्यार को ठुकरा दिया! पर माँ जब मुझे एहसास कि मैंने बहुत बड़ी गलती कि है तुम्हारा दिल दुखाया है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि तुम तो अब इस दुनियाँ में रही ही नहीं! माफी भी कैसे माँगू?मन ही मन इस बात से आज भी आत्मग्लानि होती है!
लेकिन लोग कहते हैं ना माँ कभी अपने बच्चे से दूर नहीं होती वह सदैव अपने सन्तान के पास ही रहती है इसलिए माँ मैं आज
तुम्हारे दिन के इस अवसर पर तुमसे माफी मांगती हूँ कि मैंने जाने-अनजाने आपका दिल बहुत बार दिखाया है! माँ तुम मुझे माफ कर दो! तुम जरूर आसमान से मुझे निहार रही होगी! देखो ना! आँखें भी आपसे माँफी माँग रही हैं.. आँसुओं के जरिये!
….तुम्हारी बेटी माँ…
मातृत्व दिवस के शुभ अवसर पर सभी माताओं को शुभकामनाएँ….
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शालिनी साहू
ऊँचाहार, रायबरेली(उ0प्र0)

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