मांग

Naval Pal Parbhakar

रचनाकार- Naval Pal Parbhakar

विधा- कहानी

मांग

कॉलेज के पिछे वाले ग्राऊंड में बहुत सारे पेड़ों के बीच एक लंबे-चौड़े छाया वाले पेड़ के नीचे सुमन किसी का इंतजार करते हुए बार-बार अपनी कलाई पर बंधी घड़ी को देख रही थी । शायद उसे किसी के आने का बेषब्री से इंतजार था । इसीलिए वह समय को रोकने की नाकाम कोषिष कर रही थी । आधे घंटे तक इंतजार करते हुए उसकी आंखें बोझिल होकर गिरने की कोषिष कर रही थी । सब्र करते-करते ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आज वह पूरी रात नही सोई । कुछ ही समय पश्चात् उसे एक लड़का उस तरफ आता हुआ नजर आया । अब जाके सुमन के दिल को सुकून मिला । उसके नजदीक आते ही सुमन यकायक उसके गले लगकर प्यार से सहलाने लगी । ऐसे ही वो हर रोज करती थी, मगर आज उसके ऐसा करने में एक अजीब सा आभाष हो रहा था । वह लड़का भी उसके हावभाव से विस्मित होकर उसकी कमर सहलाने लगा । कुछ देर बाद सुमन ने कहा –
सुमन – राहुल आज आप पूरे आधे घंटे लेट आये हो । पता है मैं आधे घंटे से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं ।
राहुल – अपनी घड़ी देखो सुमन, अपने मिलने वाले समय से भी पांच-छह मिनट पहले ही आया हूं । अब तुम ही समय से पहले आ गई तो मेरा क्या कुसूर ?
सुमन – तो फिर मेरी घड़ी गलत हो गई होगी ।
राहुल – चलो कोई बात नही सुमन, आओ आराम से बैठकर बातें करते हैं, और हां आज तुम्हारी आंखों को ये क्या हो गया है । तुम्हारी आंखें बोझिल सी लग रही हैं । ऐसा लगता है पूरी रात तुम किसी कारण से सो नही पाई । क्या बात है सुमन, मुझे बताओ ?
सुमन – ऐसी कोई बात नही है राहुल । मैं आज का दिन तुम्हारे साथ यहीं इसी पेड़ के नीचे गुजारना चाहती हूं । यही पेड़ हमारी दोस्ती और फिर प्रेम का प्रतीक रहा है । मैं चाहती हूं कि आज तुम्हारी गोद में सिर रखकर अपनी पुरानी बातें फिर से दोहराऊं । जिस दिन हमारी दोस्ती हुई थी ।
राहुल – छोड़ो यार, पुरानी बातों का क्या दोहराना, हमें आने वाली बातें सोचनी चाहिए । भविष्य के बारे में ।
सुमन – नही राहुल, आज तो मुझे तुमसे ढेरों बातें करनी हैं आज मैं एक भी लेक्चर अटैंड नही करूंगी और तुम भी प्रोमिस करो कि मुझे छोड़कर कहीं नही जाओगे ।
राहुल – ये तुम्हें क्या हो गया सुमन, क्यों बहकी-बहकी सी बातें कर रही हो ।
सुमन – मैं बहकी बातें नही कर रही हूं । मैं तुमसे प्यार करती हूं ।
राहुल – प्यार तो मैं भी तुमसे करता हूं । तुम क्या सोचती हो केवल तुम ही मुझसे प्यार करती हो । मैं भी तुम्हारे प्यार के लिए कुछ भी कर सकता हूं ।
सुमन – तो मेरे लिए आज बस मेरे साथ ही रहना । मुझे तुमसे बहुत सारी बातें करनी हैं ।
राहुल – ठीक है चलो, आओ मेरी गोद में अपना सिर रखकर लेट जाओ ओर हम अपनी पुरानी बातों को एक बार फिर दोहराते हैं । याद है ना सुमन, जब तुम अपनी सहेली पूजा, जिसकी शादी अभी दो महीने पहले ही हुई है के साथ इसी पेड़ के नीचे बातें कर रही थी और मैंने आकर तुमसे दोस्ती के लिए कहा था । और तुमने दोस्ती के लिए इंकार कर दिया था । पर मैं भी कहां तुम्हारा पिछा छोड़ने वाला था । दिन-रात तुम्हारा पिछे लगा रहा । उस दिन की वह शाम भी मुझे याद है जब मैं तेरे गांव गया हुआ था और शाम को तुम पूजा के साथ खेतों में घुमने के लिए आई हुई थी । तब तुम्हारे साथ तेरे गांव के कुछ लड़के छेड़छाड़ कर रहे थे तो मेरा खून खौल उठा और मैंने उनके दांत तोड़ दिए । दूसरे दिन पूजा के कहने पर मैं तुमसे इसी पेड़ के नीचे आकर मिला । मुझे डर लग रहा था कि तुम मुझे शायद कुछ भला-बुरा कहकर अपमानित करोगी ।
सुमन – पर मैंने ऐसा कुछ भी ना कहकर तुमसे केवल यही कहा था कि देखो राहुल मैं चाहती हूं कि या तो दोस्ती मत करो और यदि दोस्ती करनी है तो उसे मरते दम तक निभाना होगा । राहुल की बात काटते हुए सुमन ने बीच में टोका ।
राहुल – ठीक है सुमन मैं अपनी दोस्ती में कुछ भी करने को तैयार हूं ।
सुमन – कुछ भी …… ?
राहुल – कहकर तो देखो, मैं जान भी देने को तैयार हूं ।
सुमन – जान तो कोई भी दे सकता है । इसमें कौन-सी बड़ी बात है । तुम्हें तो मेरी खातिर जिंदा रहना है ।
राहुल – तो कुछ ओर बोलो ।
सुमन – क्या तुम मेरी मांग भर सकते हो ?
राहुल – क्यों नही……, अभी भर देता, मगर सिंदूर है कहां ?
सुमन – चलो कोई बात नही, फिलहाल तो आज का दिन पूरा जीवन समझकर तेरी बांहों में जीना चाहती हूं ।
राहुल – आज ही ….. । अभी तो हमारे सामने पूरी जिन्दगी पड़ी है ।
अभी उन्हें बातें करते हुए लगभग एक घंटा भी नही बिता था । ग्राऊंड के गेट की तरफ से चार युवक आते दिखाई दिए । सभी राहुल के दोस्त थे । उनके नाम अनूप, रवि, मोहित तथा रोहित था । कुछ ही समय में चारों उनके पास पहुंच गये । उनमें से रवि ने कहा –
रवि – क्या यार…? राहुल जब देखो, सुमन के साथ रहते हो । कभी-कभी हमारे साथ भी समय बिता लिया करो । इनके साथ तो पूरी उम्र बितानी है । क्यों भाभ

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