माँ

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

रचनाकार- सन्दीप कुमार 'भारतीय'

विधा- कविता

"माँ"

एहसास मेरा पाकर अपने भीतर
ख़ुशी से फूली न समायी
वो मेरी माँ है

आहट सुनकर मेरे आने की
थाम ली उसने सलाई
और बुनने लगी
नन्हे नन्हे दस्ताने
छोटे छोटे मोज़े
नन्ही से टोपियाँ
पिद्दी से स्वेटर

जैसे जैसे पास आया
मेरे जन्म का समय
ले कर बैठ गयी वो
अपनी सिलाई मशीन
लगी सिलने झगोले

कहाँ होते थे उस वक़्त
ये हगीज और ममी पोको पैन्ट्स
ढूंढ लिए सारे सूती कपडे घर के
और बना दिए मेरे डायपर

गर्मी हो रही है पापा परेशान हैं
उनकी सूती कमीज गायब है
माँ उनको दिखा रही है
मेरे झगोले और डायपर

समझ गए पापा भी
और मुस्कुराकर रह गए

जब जन्म पाया मैंने
बड़े जतन से माँ ने सम्हाला
कितनी ही बार बलैयाँ उतारी
सबकी बुरी नजरों से बचाकर
अपने आँचल में छुपाया

कितना सहेज कर रखा मुझे
कहीं खरोच न आ जाए मुझे
अपना वात्सल्य लुटाया
खुद गीले में सोकर
मुझे सूखे में सुलाया

हर मनुष्य पर कर्ज है
माँ के त्याग का
माँ की तपस्या का
माँ के वात्सल्य का

माँ मेरा प्रणाम है
तेरे हर बलिदान को
तेरे वात्सल्य को

बस यही दुआ है मेरी
सबके ऊपर बना रहे
साया माँ का |

"सन्दीप कुमार"

Views 54
Sponsored
Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
Posts 61
Total Views 5.4k
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती रहती हैं |
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia