माँ

राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी

रचनाकार- राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी

विधा- दोहे

बिनु माँ के सूनी धरा, सूना है संसार ।
ममता माता से सिखो, कहे राज यह सार ।
माँ की महिमा है अमित , वर्णित वेद पुराण ।
जो नर महिमा नित कहे , होता है कल्याण ।
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मनमंदिर की मूरति माता , तीरथ हैं घर द्वार।
गंगा जमुना सरस्वती जल, संगम प्रिय संसार ।
राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी

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राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी
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लेखन शौक शब्द की मणिका पिरो छंद, यति गति अलंकारित भावों से उदभित रसना का माधुर्य भाव मेरा परिचय है-

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