** माँ **

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- मुक्तक

जब से होश संभाला मैंने ,
माँ तुमको ही जाना है ।
दुनिया चाहे जो भी समझे ,
शुरू तुझ से हर फ़साना है ।।

माँ की ममता का मोल नहीं ,
ये अनमोल खजाना है ।
खुद चाहे सौ संकट झेले ,
संकट बच्चों तक नहीं आना है ।।

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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