माँ

Shri Bhagwan Bawwa

रचनाकार- Shri Bhagwan Bawwa

विधा- अन्य

आंचल तुम्हारा दरख्तों की छाया है माँ,
हर धूप से टकराना तुमने सिखाया है माँ,
तुम बेशक कहीं दूर सितारों में रहने लगी,
मेरे सर पर हमेशा तुम्हारा ही साया है माँ !

Views 6
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Shri Bhagwan Bawwa
Posts 19
Total Views 391

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia