माँ

Naveen Jain

रचनाकार- Naveen Jain

विधा- कविता

माँ का हृदय नदी सा, जिसमें बहती ममता की धारा ।
माँ का वात्सल्य अंबर सा,जिसमें समाहित जग सारा ।।
माँ दुख न बाँटती अपना, खुशियाँ सब संग मनाती है ।
माँ बच्चों को बहुत प्यारी, पिता की डाँट से बचाती है ।।

माँ बच्चों को, बड़ों का, सम्मान करना भी सिखाती है ।
माँ ही बाजार से,बच्चों को,नये-नये कपड़े
दिलाती है ।।
माँ बच्चों को खुश रखने, अपनी खुशियाँ भुलाती है ।
माँ खुद भूखी रहती पर,बच्चों को, हाथों से खिलाती है ।।

माँ के हाथों की रोटी , बच्चों को बहुत ही सुहाती है ।
माँ खुद चल जाए कांटों पर, बच्चों को गोद उठाती है ।।
माँ रात में नींद से उठकर, बच्चे को दवा पिलाती है ।
माँ एक कौर और, कह – कहकर पूरी रोटी खिलाती है ।।

माँ-माँ कह, जब बोले बच्चा, माँ फूली नहीं समाती है ।
माँ बच्चे की प्रथम गुरू है, बच्चे को निपुण बनाती है ।।
माँ राम और महावीर की गाथा, बच्चों को सुनाती है ।
माँ बच्चों को, संस्कारवान और बुद्धिमान बनाती है ।।

माँ लाड़-दुलार करती है, बच्चों का जीवन बनाती है ।
माँ; बच्चों के दुःख में, दुःखी हो अश्रु धार बहाती है ।।
माँ इस अनंत, अपार संसार रूपी दीपक में ; बाती है ।
माँ पतंग तो बच्चे धागा, बच्चों पर माँ जान लुटाती है ।।

नवीन कुमार जैन (बड़ामलहरा)

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नाम - नवीन कुमार जैन पिता का नाम - श्री मान् नरेन्द्र कुमार जैन  माता का नाम - श्री मती ममता जैन  स्थायी पता - ओम नगर काॅलोनी, वार्ड नं.-10,बड़ामलहरा, जिला- छतरपुर, म.प्र. पिन कोड - 471311 फोन नं - 8959534663 वाट्सऐप नं.- 9009867151 ई मेल - naveenjainnj2701@gmail.com शिक्षा- कक्षा 12वीं (अध्ययनरत) जन्म तिथि- 27/01/2002 प्रकाशन विवरण - स्वरचित पुस्तक- मेरे विचार 

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