माँ

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- मुक्तक

मातु , दिल की चेतना आनंद का आकाश है |
शिशु-सुजीवन अति सुहावन बनाने का रास है|
प्रीतिमय मूरत सुपावन, और सुख-सद्भावमय
भाव-जग की अमिट गरिमा,बाल-जीवन श्वास है |

लड़कपन की सुहृद गीता, आतमा- सम खास है |
कर सके ना सुकवि उपमा, क्योंकि दिल से पास है|
सुत- सुजीवन खिलखिलाते फूल-सा महके सदा|
बस यही इक कामना हो पूर्ण,ऐसी आस है |

बृजेश कुमार नायक

Views 68
Sponsored
Author
Brijesh Nayak
Posts 65
Total Views 5.6k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia