माँ

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- मुक्तक

माँ का जीवन, मातृ-वाणी , मातु की आवाज है |
रोम पुलकित, मात की भाषा का उर पर राजहै|
इस तरह से तेरा जाना , रक्त कुछ कम कर गया |
भेद नहिं कुछ, विचारों में आपकाअवतार है|

जब तलक माँ विचारों में,तभी तक यह ज्ञान है|
मानव सुहित की प्रार्थना और शुभ मुस्कान है |
गई जननी, सब गया, मैं ना रहूँ, क्या भेद है ?
आप बिन, यह मनुज जीवन, मात्र भ्रम-जग-चाम है|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

भेद=अंतर

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

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