माँ

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- मुक्तक

माँ का जीवन, मातृ-वाणी , मातु की आवाज है |
रोम पुलकित, मात की भाषा का उर पर राजहै|
इस तरह से तेरा जाना , रक्त कुछ कम कर गया |
भेद नहिं कुछ, विचारों में आपकाअवतार है|

जब तलक माँ विचारों में,तभी तक यह ज्ञान है|
मानव सुहित की प्रार्थना और शुभ मुस्कान है |
गई जननी, सब गया, मैं ना रहूँ, क्या भेद है ?
आप बिन, यह मनुज जीवन, मात्र भ्रम-जग-चाम है|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

भेद=अंतर

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी, निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र. सम्पर्क9455423376whatsaap9956928367

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