माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- गज़ल/गीतिका

माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो|
माँ अमृत की बूँद है माँ को बिलकने तुम न दो||
माँ की ममता तुम एेसे यूँ बिखरने तुम न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो||१

माँ ही ब्रम्हा माँ ही बिष्णु माँ ही भोलेनाथ है|
हर मुस्किल मे बिन स्वार्थ देती यारो साथ है||
ईश्वर के इस लेख को तुम बदलने अब न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो||२

माँ ही गंगा माँ ही यमुना माँ कावेरी रेवा है|
तत्पररहकरयारोसुनलो करतीसबकीसेवा है||
नदी सागर तालाबो को,यारो मरने तुम न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो||३

माँ ही मृत्यु माँ ही जीवन माँ ही यारो प्राण है|
सारे जगका सुनलो यारो करती माँ कल्याण है||
सारे जग को एेसे यारो यूँ बदलने तुम न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो||४

माँ ही भव है माँ ही सागर सबको जग से तार दे|
सारी जिंदगी खुशहाली से यारो माँ गुजार दे||
बूढ़ी माँ तुम यूँ अपनी यूँ बिलकने तुम न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो||५

माँ ही दृृष्टि माँ ही श्रृष्टि माँ ही सब संसार है|
माँ ही सच्चा यार यारो, माँ ही सबका प्यार है||
सारी श्रृष्टि तुम यारो यूँ उजड़ने तुम न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो||६

माँ की सेबा करलो यारो माँ ही देती जान है|
माँ का ही दुलारा है तू माँ का ही तो प्राण है||
माँ की इच्छाओ को यारो यूँ बिखरने तुम न दो|
माँ बडी अनमोल है माँ को तडपने तुम न दो||७
कृष्णकांत गुर्जर
मो.7804060303

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