” माँ ने किया अबोला है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- गीत

काम काज है ,
फुरसत ना है ,
बांध दिया यह झूला है !
मां ने किया अबोला है !!

हवा से बातें करता हूँ तो ,
हंसी मुझे आ जाती है !
मां की झलक आंख बसी है ,
खुशियां ही दे जाती है !
होले से वह डोर खींच कर –
देती एक झकोला है !!

कामकाज को सभी गये हैं ,
में ही एक निठल्ला हूँ !
मां घर के सब काम सँवारे ,
में उनका दुमछल्ला हूँ !
आँचल में बस प्यार पल रहा –
बाकी चना चबोला है !!

नींद रात की उड़ जाती है ,
महफिल मेरे नाम सजे !
दीन देश की खबर मिले तो ,
मेरे भी हैं कान बजे !
देख देख में स्वांग बदलता –
सबने बदला चोला है !!

बात बात तकरार भी होती ,
पल पल में है रुख बदले !
देश समाज की में क्या जानूँ ,
मन मेरा भी है पिघले !
प्यार से रहना सीखें मुझसे
इसने ही झकझोला है !!

बृज व्यास

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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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