माँ झूट बोलती है ।

pratik jangid

रचनाकार- pratik jangid

विधा- कविता

माँ झूट बोलती है ।

सुबह उठाने के लिए 7 बजे के time को 8 बताती है।

शाम खाना खाते समय रोटी कम रहने पर मेरा पेट भर गया ये रोटी तू खा ले ओर खुद भूकी सो जाती है ।

माँ झूट बोलती है ।

सर्द रातो में अपनी रज़ाई भी मुझे उड़ाती है ।खुद थोड़ा सा ओढ़ती है और ठिठुरती हुई सयो जाती है ।

पापा की डांट से बचाने के लिए अपनी गलती बता कर खुद डॉट खाती है । पर मुझे मार से बचाती है ।

माँ झूट बोलती है ।

जब कभी तबियत खराब हो जाती है ।और पूछने पर ठीक हु ऐसा कहकर घर के सारे काम निपटाती है ।

माँ झूट बोलती है ।

पर माँ बहुत याद आती है। बहुत याद आती है

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